શનિવાર, 25 ફેબ્રુઆરી, 2023



Hydroponics farming in hindi:

आज हम ऐसी ही तकनीक की बात करेंगे, जिसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होती है। इस तकनीक का नाम है- हाइड्रोपोनिक्स विधि से खेती (Hydroponics farming)

तो आइए इस में जानते हैं कि हाइड्रोपोनिक्स खेती क्या है? और हाइड्रोपोनिक्स खेती कैसे करें?

हाइड्रोपोनिक खेती की ट्रेनिंग कहां से लें





आइए सबसे पहले जान लेते हैं कि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक क्या है?
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक (Hydroponics technology)

आसान भाषा में कहें तो हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में मिट्टी की जरूरत नहीं होती है। पौधे के लिए सभी आवश्यक खनिज और उर्वरक पानी के माध्यम से दी जाती है। फसल उत्पादन के लिए सिर्फ 3 चीजें पानी, पोषक तत्व और प्रकाश की जरूरत है। यदि ये 3 चीजों हम बिना मिट्टी के उपलब्ध करा दें तो पौधे फल-फूल सकते हैं। इसी को हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कहते हैं।

इस तकनीक में मिट्टी के बगैर, जलवायु को नियंत्रित करके खेती की जाती है। हाइड्रोपोनिक खेती में केवल पानी में या पानी के साथ बालू और कंकण में पौधे उगाए जाते हैं।

इस तकनीक में प्लास्टिक के पाइप से चैंबर बनाया जाता है जिसे कोको-पिट कहा जाता है। इस कोको-पिट को दूर बैठे कहीं से भी कंट्रोल किया जा सकता है।

हाइड्रोपोनिक्स विधि का महत्व

बढ़ती आबादी और खेती की लिए कम पड़ती ज़मीन को देखते हुए हाइड्रोपोनिक्स तकनीक बहुत ही कारगार है। ऊंची इमारतों की छत पर भी इस विधि से खेती की जा सकती है। शहरवासी खुद अपने लिए सब्जियों का उत्पादन कर सकेंगे।
अभी तक हाइड्रोपोनिक्स तकनीक फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में सबसे अधिक प्रचलित है। भारत में नई दिल्ली, मुंबई, बंगलौर जैसे शहरों में भी इस मॉडल का बहुत तेजी से उपयोग कर रहे हैं।
हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाई जाने वाली सब्जियां

धनिया
टमाटर
पालक
खीरा
करेला
गुलाब
मिर्च इत्यादि

हाइड्रोपोनिक खेती कैसे की जाती है?

हाइड्रोपोनिक खेती में पाइप का प्रयोग करके पौधों को उगाया जाता है। पाइप में कई छेद बने होते हैं, जिसमें पौधे लगाए जाते हैं। इन्हीं पाइप के माध्यम से पौधे पोषक तत्वों को ग्रहण करते हैं।
हाइड्रोपोनिक खेती के पोषक तत्व

आपके मन में यही सवाल होगा कि पौधे के लिए तो केवल मिट्टी में ही पोषक तत्व पाए जाते हैं। तो आपको बता दें, कि ये सभी पोषक तत्वों को पानी में ही घोल कर दिया जाता है।

इसमें फास्फोरस, नाइट्रोजन, पोटाश, जिंक, सल्फर, मैग्निशियम, कैलशियम, आयरन आदि कई पोषक तत्व और खनिज पदार्थों को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को निर्धारित किए गए समय के अंतराल पर पानी में मिलाया जाता है। जिससे पौधों को सभी पोषक तत्व मिलते रहते हैं।
हाइड्रोपोनिक तकनीक के फायदे (Benefits of hydroponic farming in Hindi)

इस तकनीक से बिना मिट्टी की भी खेती जाती है।
पानी से ही पौधों को सीधा पोषण मिलता है।
मिट्टी इस्तेमाल न होने से खरपतवार नहीं होता है।
इस तकनीक में पौधे 25-30% तेजी से वृद्धि करते हैं।
सब्जी में स्वाद, पोषण ज्यादा पाया जाता है।
इससे मिट्टी को प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
इसे घरों के छतों पर भी खेती की जा सकती है।
शहरों के लिहाज से यह तकनीक काफी उपयुक्त है

हाइड्रोपोनिक खेती की ट्रेनिंग कहां से लें?

हाइड्रॉपनिक्स तकनीक के सेटअप के लिए कई कंपनियां काम करती हैं जो शौकिया गार्डन से लेकर कमर्शियल फार्म सेट करने में आपकी मदद करती है। इसमें लेटसेक्ट्रा एग्रीटेक, बिटमाइंस इनोवेशंस, ट्राइटन फूडवर्क्स, फ्यूचर फार्म्स, जैसे कृषि स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। इन कंपनियों से हाइड्रॉपनिक्स सेटअप को आप खरीद सकते हैं। ये कंपनियां ट्रेनिंग से लेकर सिस्टम लगाने की सुविधा प्रदान करते हैं।

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બુધવાર, 22 ફેબ્રુઆરી, 2023


હાઇડ્રોપોનિક ખેતીમાં ઉપયોગમાં લેવાતા પોષક દ્રાવણની રચના ચોક્કસ છોડ ઉગાડવામાં આવે છે અને વધતી જતી પરિસ્થિતિઓના આધારે બદલાઈ શકે છે, પરંતુ લાક્ષણિક સૂત્રમાં નીચેનાનો સમાવેશ થઈ શકે છે: મેક્રો-પોષક તત્વો: નાઇટ્રોજન (N) ફોસ્ફરસ (P) પોટેશિયમ (K) કેલ્શિયમ (Ca) મેગ્નેશિયમ (એમજી) સલ્ફર (S) સૂક્ષ્મ પોષક તત્વો: આયર્ન (Fe) મેંગેનીઝ (Mn) ઝીંક (Zn) કોપર (Cu) બોરોન (B) મોલિબડેનમ (Mo) ક્લોરિન (Cl) પોષક તત્ત્વોના દ્રાવણને સામાન્ય રીતે પાણીમાં ભળીને એક પાતળું દ્રાવણ બનાવવામાં આવે છે જે છોડના મૂળ દ્વારા શોષી શકાય છે. દરેક પોષક તત્ત્વોની ચોક્કસ સાંદ્રતા ઉગાડવામાં આવતા છોડની ચોક્કસ જરૂરિયાતો અને તેઓ કયા વિકાસના તબક્કામાં છે તેના પર નિર્ભર રહેશે. પોષક દ્રાવણના pH અને વિદ્યુત વાહકતા (EC) નું નિયમિતપણે નિરીક્ષણ કરવું મહત્વપૂર્ણ છે કે તે અંદર રહે તેની ખાતરી કરવા માટે. છોડના વિકાસ માટે શ્રેષ્ઠ શ્રેણી છે........ વધુ વિગતો જાણવા ઈમેલ કરો
The formulation of the nutrient solution used in hydroponic farming can vary depending on the specific plants being grown and the growing conditions, but a typical formula might include the following: Macro-nutrients: Nitrogen (N) Phosphorus (P) Potassium (K) Calcium (Ca) Magnesium (Mg) Sulfur (S) Micro-nutrients: Iron (Fe) Manganese (Mn) Zinc (Zn) Copper (Cu) Boron (B) Molybdenum (Mo) Chlorine (Cl) The nutrient solution is typically mixed with water to create a diluted solution that can be absorbed by the plant roots. The exact concentrations of each nutrient will depend on the specific requirements of the plants being grown and the stage of growth they are in. It is important to monitor the pH and electrical conductivity (EC) of the nutrient solution regularly to ensure that it remains within the optimal range for plant growth. send Email Address for any more details